शिमला. हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय में स्टेशनरी का संकट है। हालांकि, सरकार के पास अभी एक महीने तक का काेटा है, लेकिन आने वाले दाे माह में दिक्कत हाे सकती है। सचिवालय में सेवाएं दे रहे कर्मचारी से लेकर अफसरों को कागज, पेन सहित अन्य स्टेशनरी की कमी खल रही है। मामला तब सामने आया जब सचिवालय की हर ब्रांच में ए-फाेर कागज, पेन-काॅपी पहले के मुकाबले कम सप्लाई दी जा रही थी। इस मसले काे सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संगठन ने भी प्रशासन के समक्ष उठाया, लेकिन कहा गया कि सचिवालय की आरएंडआई रिसिव्ड एंड इश्यू ब्रांच को अागामी दाे से तीन महीने तक पुरानी स्टेशनरी से ही काम चलाना पड़ेगा।
यहां तक कि फाइल कवर अाैर ए-फाेर सब स्टेंडर्ड के भी पाए गए। आर एंड आई एसओ कुसुम लता के मुताबिक पिछले दिनों से स्टेशनरी की सप्लाई कम हो रही है। भारत सरकार की एप जीआईएम के माध्यम से ई टेंडरिंग प्रक्रिया के बाद ही स्टेशनरी की सप्लाई होगी।
स्टेशनरी खरीद के लिए है यह प्रक्रिया: प्रदेश सचिवालय को स्टेशनरी के लिए अब भारत सरकार की एप जीइएम यानी गवर्मेंट ई-मार्केटिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इस एप के माध्यम से आवेदन करने के बाद भारत सरकार से इ-टेंडिरंग प्रक्रिया के तहत ही स्टेशनरी की सप्लाई हाेगी। इसमें एल-वन टेंडर में पास हाेने वाली किसी निजी कंपनी काे ही स्टेशनरी सप्लाई करने की मंजूरी दी जाती है। उसके बाद प्रदेश सरकार का प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी डिपार्टमेंट काे मांग के मुताबिक स्टेशनरी की सप्लाई हाेती है।
सभी कर्मचारियों की स्थिति एक जैसी नहीं: प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य सचिवालय में सेवाएं दे रहे बाबू खुद ही नाेटबुक्स अाैर पेन खरीद कर ला रहे हैं। हालांकि एेसी स्थिति सभी कर्मचारियाें की नहीं हैं, लेकिन कुछ बाबुअाें काे इस तरह की नाैबत अा रही है। हैरानी की बात है कि प्रदेश सरकार के घर यानी सचिवालय में सेवाएं देने वाले बाबुअाें काे स्टेशनरी का संकट नजर अा रहा है।
डिजिटल इंडिया का भी पड़ रहा असर: देश में माेदी सरकार ने जब से डिजिटल इंडिया प्राेग्राम की शुरुअात की है, उस समय से सरकारी कामकाज में मैनुअल सिस्टम पर असर पड़ने लगा है। हालांकि हिमाचल में अभी तक विधानसभा को छाेड़ अन्य काेई भी विभाग डिजिटल नहीं हुअा है, लेकिन अाने वाले समय में कागज-कलम की पंरपरा समाप्त हाे सकती है। एेसा ही असर भारत सरकार से स्टेशनरी की सप्लाई में देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार से मिलने वाली स्टेशनरी अाने वाले समय में अाैर कम हाे सकती है क्योंकि डिजिटल इंडिया के तहत कागजाें पर कंट्राेल अाैर कम्प्यूटरीकरण काे प्राथमिकता दी जाएगी।